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Bihar Police Bribe Case: पटना में 27 हजार रुपये रिश्वत लेते थानाध्यक्ष गिरफ्तार, थाना परिसर में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई

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Alam Ki Khabar: पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित सामियागढ़ थाना के थानाध्यक्ष को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 27 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए थाना परिसर से रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

पटना, 21 जुलाई। आलम की खबर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित सामियागढ़ थाना के थानाध्यक्ष सह पुलिस अवर निरीक्षक सौरभ कुमार को 27 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई की सबसे अहम बात यह रही कि विजिलेंस की टीम ने आरोपी अधिकारी को थाना परिसर के भीतर ही दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

जानकारी के अनुसार, मामला क्षेत्र में मिट्टी खुदाई और व्यावसायिक कार्यों के लिए जेसीबी मशीन के संचालन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से शिकायत की थी कि निर्बाध रूप से जेसीबी चलाने देने के बदले थाना प्रभारी की ओर से लगातार अवैध राशि की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया।

पूर्व निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता आरोपी अधिकारी को 27 हजार रुपये देने थाना पहुंचा। जैसे ही राशि सौंपी गई, पहले से निगरानी कर रही विजिलेंस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने रिश्वत की राशि भी जब्त कर ली। इस अभियान का नेतृत्व वरीय पुलिस उपाधीक्षक अरुणोदय पांडे और डीएसपी आदित्य राज ने किया। कार्रवाई के दौरान निगरानी विभाग के कई अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी मौजूद रहे।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि अवैध वसूली का यह मामला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने वाले किसी भी सरकारी कर्मी के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्टाचार पर सख्ती ही जनता का भरोसा बढ़ाएगी

सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी है। ऐसी कार्रवाई न केवल गलत संदेश देने वालों पर अंकुश लगाती है, बल्कि आम लोगों का कानून और प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत करती है।

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